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तुम दर्द हो….. Hindi Poetry by Mahendra Sangawa

Hindi Poetry

बड़े-से-बड़े सूरमाओं के छक्के छुड़ाने वालें ।

सारे कामों से मुक्त करके इंसान को समय दिलाने वालें ॥

समय होते हुए भी समय का उपयोग ना करने देने वालें ।

भरी गर्मी में शरीर को कंपाने वालें ॥

बड़े बड़े अहंकारियों को अपने कदमों में झुकाने वालें ।

जब चाहे तब इंसान को उसकी औकात दिखाने वालें ॥

इंसान की सोच को पूरी तरह से बदलने वालें ।

जबरदस्ती अपना एहसास कराने वालें ॥

खुद की अहमियत बताने वालें ।

इंसान को उसकी कमियाँ बताने वालें ॥

अपनों और परायों से रूबरू कराने वालें ।

शांत मन को व्यथित करने वालें ॥

सबसे व्यस्त इंसान को आराम करवाने वालें ।

अपने कठोर प्रभाव से पीड़ा पहुँचाने वालें ॥

तुम बुरे होकर भी, हमें कितना कुछ सीखा देते हो ।

तुम दर्द हो,

शरीर में उठो तो तड़पा देते हो ।

हृदय में उठो तो राह भटका देते हो ॥

तुम्हारा एहसास इतना निराला हैं, कि

सब तुमसे बचना चाहते हैं ।

लेकिन सच तो ये हैं कि कोई तुमसे आज तक बच नहीं पाया हैं ।

तुम दर्द हो, इसलिए समर्थ हो कि तुम इंसान को झुका सकते हो ।

तुम दर्द हो, इसलिए मैं तुमसे सीखता हूँ कि व्यक्ति का जीवन कैसा होना चाहिए ।

लेकिन अफसोस तुम्हारी इतनी पीड़ा के पश्चात भी लोग तुम्हारी शिक्षा को भूल जाते हैं और फिर से तुम्हारे आने का इंतजार करते हैं ।

Originally Created & Written By –

Mahendra Sangawa

Motivational Speaker, Life Management Speaker, Relationship Consultant, Writer and Founder of Locoself Consultancy Services.

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